शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
वैष्णो देवी धाम, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां देवी वैष्णी प्राचीन समय में 9 माह तक रही थी न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अति प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष यहां लाखों की गिनती में लोग शामिल होते हैं। बात करें इस वर्ष यानि 2022 कि तो इस बार भी यात्रा प्रारंभ होने के बाद से ही भक्तों को वैष्णो देवी के धाम पर आना जाना लगातार दिखाई दे रहा है। जहां एक तरफ नियमित रूप से यहां दर्शन करने वालों को गिनती से जुड़ी खबरें भक्तों मे उत्साह लाती है, तो वहीं यहां होने वाली दुर्घटनाएं लोगों को दुखी करती हैं। जी हां, बात कर इसी वर्ष यानि 2022 में वैष्णों देवी के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं में कुछ लोग भीड़ के चलते मची भगदड़ में मौत का शिकार हो गए, तो वहीं बहुत से लोग इस दौरान जख्मी भी हुए। बताया जाता है किसी भी देव स्थान पर किसी भी प्रकार के हादसे का कारण अधिकतर रूप से भगदड़ ही रहा है। वैष्णो देवी धाम पर होने वाला ये हादसा कोई एकलौता हादसा नहीं है, बल्कि आझ से पहले यहां कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं। तो चलिए जानते हैं वैष्णो देव धाम में हुई 7 ऐसे हादसे जिन्होंने बड़ी दुर्घटना का रूप ले लिया था-

पिछले साल 22 दिसंबर 2021 को माता वैष्णो देवी भवन के मार्ग पर अर्धकुंवारी स्थित बाजार की एक दुकान में सिलेंडर ब्लास्ट होने के कारण, एक बड़ा धमाका हुआ था जिसके चलते भीष्ण आग लग गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस हादसे में 5 लोगों के झुलसने का समाचार आया था। इतना ही नहीम हादसे के बाद अफरातफरी मच जाने के कारण कई अन्य लोग घायल भी हुए थे।

शेयर बाजार ने फिर रचा इतिहास, Sensex ने पहली बार 60 हजार का छुआ आंकड़ा

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार ने नया इतिहास रच दिया. शुक्रवार को मिले-जुले वैश्विक संकेतों के साथ सेंसेक्स इतिहास में पहली बार 60,000 के ऊपर खुला.

Asna Delhi, 24 September 2021 ( Updated 24, September, 2021 12:00 PM IST ) 2981 8 -->

शेयर बाजार ने फिर रचा इतिहास, Sensex ने पहली बार 60 हजार का छुआ आंकड़ा

प्रतीकात्मक तस्वीर

सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार ने नया इतिहास रच दिया. शुक्रवार को मिले-जुले वैश्विक संकेतों के साथ सेंसेक्स इतिहास में पहली बार 60,000 के ऊपर खुला. वहीं निफ्टी ने भी रिकॉर्ड स्तर पर शुरुआत की. कारोबार के दौरान बीएसई का 30 शेयरों वाला प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 60333 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया. फिलहाल सेंसेक्स 310 अंकों की बढ़त के साथ 60196 पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी 81 अंक चढ़कर 17900 के पार पहुंच गया है. निवेशकों की दौलत बाजार में रिकॉर्ड तेजी से 1.40 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई. इसके साथ ही बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैप 263 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया.

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में इंफोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, मारुति में बढ़त देखने को मिल रही है। हालांकि टाटा स्टील, एचयूएल, टाइटन, एचडीएफसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज में कमजोरी है.

रियल्टी-आईटी इंडेक्स में सबसे ऊंची छलांग

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो आज के कारोबार में सबसे बड़ी तेजी रियल्टी शेयरों में देखने को मिल रही है. निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.59 फीसदी और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2.31 फीसदी चढ़ा. इसके अलावा निफ्टी बैंक इंडेक्स 0.43 फीसदी, निफ्टी ऑटो इंडेक्स 0.24 फीसदी चढ़ा.

भारतीय रेलवे का काला दिन: बिहार में विश्व के दूसरे बड़े ट्रेन हादसे में हुई थी 300 से ज्यादा मौतें, कई जोड़े शादी कर लौट रहे थे घर

6 जून को भारतीय रेलवे का काला दिन भी कहा जा सकता है। सन 1981 में बिहार के खगड़िया जिले में हुआ ट्रेन हादसा देश का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा कहा जा सकता है। इस हादसे में ट्रेन बागमती नदी में समा गई थी। हादसे में 300 से ज्यादा.

चितरंजन सिंह, खगड़िया: छह जून 1981 की शाम कोसी क्षेत्र वासियों के मानस पटल पर सदा के लिए अंकित हो गया है। उस दिन ही मानसी-सहरसा रेलखंड (तब छोटी रेल लाइन थी) के बदला घाट-धमारा घाट स्टेशन के बीच बागमती नदी पर बने पुल संख्या-51 पर (अब रिटायर्ड पुल) ट्रेन हादसे में लगभग तीन सौ यात्रियों की जान चली गई थी। यह देश की सबसे बड़ी रेल दुर्घटनाओं में एक है। छह जून 1981 को मानसी से ( 416 डाउन सवारी गाड़ी) सहरसा के लिए पैसेंजर ट्रेन चली। जो उक्त पुल के पास पहुंचते ही हादसे का शिकार हो गई। ट्रेन की सात बोगियां बागमती नदी में समा गई।

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बागमती उफान पर थी इसलिए राहत और बचाव कार्य में भी काफी परेशानी आई। कई दिनों तक बागमती नदी से शव मिलता रहे। इस ट्रेन हादसे में खगड़िया जिले समेत पड़ोसी सहरसा, मधेपुरा और सुपौल जिले के कई लोगों की जानें गई थी। गांव-गांव में कई दिनों तक मातम पसरा रहा।

जरा, इनकी सुनिए.

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धमारा घाट स्टेशन से कुछेक किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले ठुठी मोहनपुर गांव के अनिल सिंह कहते हैं, 'जिस समय यह घटना उस समय बारिश हो रही थी। तेज हवा भी चल रही थी। हादसे का भयावह मंजर आज भी याद करता हूं तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं।'

धुतौली पंचायत के तत्कालीन मुखिया गुणेश्वर प्रसाद के दिमाग में आज भी वह शाम दौड़ रही है। वे कहते हैं, 'शाम के साढ़े चार बजे के आसपास की बात होगी। आंधी और बारिश हो रही थी। तभी बहुत ही जोरदार आवाज हुई। कुछेक मिनटों में जंगल की आग की तरह यह खबर फैल गई कि बदला घाट-धमारा घाट स्टेशन के बीच पुल संख्या 51 के पास ट्रेन बागमती में समा गई है। मैं और रामानंद सिंह समेत कई लोग उधर दौड़ पड़े। घटना स्थल पर जो दृश्य देखा, उसका वर्णन नहीं कर सकते हैं। वह स्याह शाम भुलाने से नहीं भुलाती है। कई लोग मारे गए। बागमती चीख-पुकार, करुण कुंदन से हाहाकार मचा रहा था। धुतौली मालपा से उक्त स्थल की दूरी चार से पांच किलोमीटर होगी।'

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भारतीय रेलवे के इतिहास का काला अध्याय

बारिश का महीना था और ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी, कि तभी अचानक ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया। जिसके बाद पैसेंजर ट्रेन की सात बोगी पुल से बागमती नदी में जा गिरी। ट्रेन बागमती नदी पर बनाए गए पुल संख्या 51 को पार कर रही थी। ड्राइवर ने इतिहास की सबसे बड़ी शेयर बाजार दुर्घटना क्या थी? ब्रेक क्यों लगाई, यह इतिहास में दफन है। कुछेक लोग कहते हैं कि जब ट्रेन बागमती नदी पर बने पुल को पार कर रही थी, तभी ट्रैक पर गाय व भैंस की झुंड आ गया, जिसे बचाने के चक्कर में ड्राइवर ने ब्रेक मारी थी। यह भी कहा जाता है कि बारिश और आंधी के कारण यात्रियों ने ट्रेन की सभी खिड़कियां बंद कर दी थी। आंधी की वजह से पूरा दबाव ट्रेन पर पड़ा और बोगियां नदी में समा गई।

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विश्व का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेन हादसा

बिहार में हुए इस ट्रेन हादसे को विश्व का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेन हादसा कहा जा सकता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस हादसे आठ साढ़े आठ सौ लोगों की मौत हुई होगी। क्योंकि कइयों का शव तक नहीं मिला। बता दें कि विश्व की सबसे बड़ा ट्रेन हादसा 2004 में श्रीलंका में हुआ था। इस साल वहां आई सुनामी की तेज लहरों में ओसियन क्वीन एक्सप्रेस ट्रेन समा गई थी। जानकारी मुताबिक इस ट्रेन हादसे में 1700 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

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कई शादी कर लौट रहे थे

लोगों की मानें तो उन दिनों यातायात के साधन कम थे। शादियों का सीजन था। ट्रेन में कई ऐसा यात्री थे, जो बाराती थे। कई जोड़ियां नई नवेली थी और भविष्य के सपने बुनते हुए अपने गंतव्य को जा रही थीं लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था। इस हादसे में कइयों के तो शव तक नहीं मिले।

सबसे बड़ा रेल हादसा, पुल तोड़कर नदी में जा गिरी थी ट्रेन, तड़प-तड़प कर मर गए थे 800 से भी ज्यादा यात्री

6 जून 1981 के दिन, शाम का वक्त था. उन दिनों, बारिश का मौसम चल रहा था. 9 बोगियों वाली पैसेंजर ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी. गाड़ी संख्या 416dn मानसी से सहरसा की ओर जा रही थी.

सबसे बड़ा रेल हादसा, पुल तोड़कर नदी में जा गिरी थी ट्रेन, तड़प-तड़प कर मर गए थे 800 से भी ज्यादा यात्री

भारत (India) में होने वाले रेल हादसों (Rail Accidents) में हर साल सैकड़ों लोगों की जानें जाती हैं. हालांकि, बीते कुछ सालों से रेल हादसों पर जबरदस्त लगाम लगी है और ऐसे हादसों में मारे जाने वालों का आंकड़ा भी काफी कम हुआ है. देश में होने वाले रेल हादसों की कई वजहें होती हैं. इन हादसों में तकनीकी खराबी, मानवीय भूल, लापरवाही, खराब मौसम आदि शामिल हैं. सरकारी इतिहास की सबसे बड़ी शेयर बाजार दुर्घटना क्या थी? आंकड़ों (Government Data) के मुताबिक साल 2019 में रेल हादसों के लिहाज से काफी सुरक्षित रहा. भारतीय रेलवे के इतिहास में 166 साल बाद ऐसा हुआ, जब रेल दुर्घटना में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई. लेकिन, देश में एक ऐसा रेल हादसा भी हुआ था जिसे भूल पाना नामुमकिन है. इस रेल हादसे ने सिर्फ देश को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था.

6 जून 1981 को हुआ था जीवनभर याद रहने वाला भयानक रेल हादसा आज हम आपको भारतीय रेल इतिहास के सबसे भयानक हादसे के बारे में बताने जा रहे हैं. इस हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. 6 जून 1981 के दिन, शाम का वक्त था. उन दिनों, बारिश का मौसम चल रहा था. 9 बोगियों वाली पैसेंजर ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी. गाड़ी संख्या 416dn मानसी से सहरसा की ओर जा रही थी. ट्रेन बदला घाट और धमारा घाट स्टेशन के बीच अभी बागमती नदी से गुजर ही रही थी कि एक भयानक हादसा हो गया. ट्रेन बागमती नदी (Bagmati River) के ऊपर बने पुल संख्या-51 पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई. हादसे के कारण ट्रेन के पिछले 7 डिब्बे उससे अलग होकर नदी में गिर गए. बारिश की वजह से बागमती का जलस्तर बढ़ा हुआ था जिसकी वजह से ट्रेन पलक झपकते ही नदी में डूब गई.

बागमती नदी में डूब गए थे ट्रेन के 7 डिब्बे हादसे के बाद जब ट्रेन के 7 डिब्बे नदी में गिरे तो वहां यात्रियों की चीख-पुकार मच गई. ट्रेन में सफर करने वाले यात्री अपनी जान की भीख मांगते हुए चीखते-चिल्लाते रहे लेकिन उस वक्त उन्हें बचाने वाला वहां कोई नहीं था. जब तक आसपास के लोग नदी के पास पहुंचते, तब तक सैकड़ों लोगों की नदी में डूबकर मौत हो चुकी थी. इस हादसे को भारत का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल हादसा बताया जाता है. इस भीषण रेल हादसे के बाद कई दिनों तक सर्च ऑपरेशन चला. गोताखोरों ने 5 दिन की कड़ी मशक्कत के बाद नदी से 200 से भी ज्यादा लाशें निकालीं. बताया जाता है कि कई लाशें तो ट्रेन के अलग-अलग हिस्सों में फंसी हुई थीं. इसके अलावा कई लोगों की लाशें नदी के बहाव के साथ बह गईं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इस हादसे में करीब 300 यात्रियों की मौत हुई थी जबकि इतिहास की सबसे बड़ी शेयर बाजार दुर्घटना क्या थी? आसपास के लोगों ने बताया कि देश के इस सबसे बड़े रेल हादसे में करीब 800 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.

हादसे को लेकर कई वजहें बताते हैं लोग 6 जून, 1981 को हुए इस हादसे की वजह को लेकर कई कारण बताए जाते हैं. कोई कहता है कि तेज आंधी की वजह से ये हादसा हुआ था तो कोई कहता है कि नदी में अचानक बाढ़ आ जाने की वजह से ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. इसके अलावा कुछ लोगों का ये भी कहना है कि पुल पर आई एक गाय को बचाने के लिए लोको पायलट ने अचानक तेज ब्रेक लगा इतिहास की सबसे बड़ी शेयर बाजार दुर्घटना क्या थी? दिए थे, जिसकी वजह से ट्रेन के पिछले 7 डिब्बे पलट गए और पुल को तोड़ते हुए नदी में जा गिरे और फिर डूब गए. इस रेल हादसे को आने वाली 6 जून को पूरे 40 साल हो जाएंगे, लेकिन इसका दर्द अभी तक कम नहीं हुआ है.

ये हैं अब तक की वैष्णो देवी धाम में होने वाली सबसे बड़ी दुर्घटनाएं की List

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वैष्णो देवी धाम, जिसके बारे में मान्यता है कि यहां देवी वैष्णी प्राचीन समय में 9 माह तक रही थी न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अति प्रसिद्ध है। प्रत्येक वर्ष यहां लाखों की गिनती में लोग शामिल होते हैं। बात करें इस वर्ष यानि 2022 कि तो इस बार भी यात्रा प्रारंभ होने के बाद से ही भक्तों को वैष्णो देवी के धाम पर आना जाना लगातार दिखाई दे रहा है। जहां एक तरफ नियमित रूप से यहां दर्शन करने वालों को गिनती से जुड़ी खबरें भक्तों मे उत्साह लाती है, तो वहीं यहां होने वाली दुर्घटनाएं लोगों को दुखी करती हैं। जी हां, बात कर इसी वर्ष यानि 2022 में वैष्णों देवी के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं में कुछ लोग भीड़ के चलते मची भगदड़ में मौत का शिकार हो गए, तो वहीं बहुत से लोग इस दौरान जख्मी भी हुए। बताया जाता है किसी भी देव स्थान पर किसी भी प्रकार के हादसे का कारण अधिकतर रूप से भगदड़ ही रहा है। वैष्णो देवी धाम पर होने वाला ये हादसा कोई एकलौता हादसा नहीं है, बल्कि आझ से पहले यहां कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं। तो चलिए जानते हैं वैष्णो देव धाम में हुई 7 ऐसे हादसे जिन्होंने बड़ी दुर्घटना का रूप ले लिया था-
इतिहास की सबसे बड़ी शेयर बाजार दुर्घटना क्या थी?
पिछले साल 22 दिसंबर 2021 को माता वैष्णो देवी भवन के मार्ग पर अर्धकुंवारी स्थित बाजार की एक दुकान में सिलेंडर ब्लास्ट होने के कारण, एक बड़ा धमाका हुआ था जिसके चलते भीष्ण आग लग गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस हादसे में 5 लोगों के झुलसने का समाचार आया था। इतना ही नहीम हादसे के बाद अफरातफरी मच जाने के कारण कई अन्य लोग घायल भी हुए थे।

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उपरोक्त घटना के पहले इसी साल 9 जनवरी 2021 को माता वैष्णो देवी भवन के पास कालिका कांप्लेक्स स्थित काउंटिंग रूम में शार्ट सर्किट से आग लग गई थी। हालांकि इसमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, 2 पुलिसकर्मी मामूली रूप से झुलसे थे। बता दें ये घटना प्राकृतिक गुफा से महज 100 मीटर दूर ही घटित थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2017 में 30 जनवरी को भूस्खलन हुआ था। बताया जाता है यह हादसा माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हिमकोटी से पहले देवी द्वार क्षेत्र में हुआ था। जिस दौरान एक महिला श्रद्धालु की मौत हो गई थी। तो वहीं 3 बच्चों सहित 8 अन्य श्रद्धालु इस घटना में घायल हुए थे। इस घटना के चलते व खराब मौसम के कारण उस समय बैटरी कार सेवा कुछ देर के लिए स्थगित कर दी गई थी।

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बात करें साल 2015 की तो इस वर्ष नवंबर में हेलीकॉप्टर हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी। बता दें कटरा से वैष्णो देवी हेलीकॉप्टर सर्विस चलती है, जो सीधे पहाड़ी पर पहुंचाती है। इस हादसे में पवन हंस सेवा का पायलट की भी जान चली गई थी। बताया जाता है वैष्णो देवी धाम में इससे पहले इसी तरह के 3 और हादसे हो चुके हैं।

बता दें जुलाई 1988, 30 दिसंबर 2012 को़ और 30 जनवरी 2001 को हेलीकॉप्टर हादसे हुए थे। जुलाई 1988 में जब सांझी छत हेलीपैड पर हादसा हुआ तो पवन हंस के हेलीकॉप्टर में सवार 6 श्रद्धालुओं और पायलट की मौत हुई थी। इसी प्रकार के एक अन्य हादसे में जो 30 जनवरी 2001 को हुआ था, उसमें सेना के एक ब्रिगेडियर, कैप्टन, मेजर और दो पैरा कमांडो की मौत हुईछ थी। इसके अलावा 30 दिसंबर 2012 को हुए हादस में पवन हंस सेवा के पायलट की सूझबूझ से अधिक नुकसान नहीं हुआ था और उसने पहाड़ियों से बचाते हुए हेलीकॉप्टर को खेतों में उतार लिया था, हालांकि फिर भी हेलीकॉप्टर में सवार 2 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे।

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